Thursday, November 17, 2011

राजनीति सेवा नही मजबूरी है - एक विशलेषण

अपने भरसक प्रयासो व मतदान के बाद मे यह निष्कर्ष निकाल पाया हूँ की राजनीति कोई सेवा भाव नही वरन एक मजबूरी है, जो स्वयं राजनेताओ के नियंञण मे नही है!  अब इस निष्कर्ष को वैगयानिक तरीके से प्रमाणित करने के लिए मुझे कम से कम १०० MPs का DNA जाँच कर उनके ८००  वर्ष का वंश वृक्ष तेयार करवाना होगा ओर यह पता करवाना होगा के कितने प्रतिशत लोगो के वंश मे राजाओ, नॅवॉबो, राय बहादुर, ज़मींदार वंश से संबध है!

एक व्यक्ति राजनीति मे क्यों जाना चाहेगा - समाज या देश सेवा के लिए ऐसा हम प्रयाय सुनते है, लेकिन क्या आप सरदार पटेल, शास्त्री जैसे अपवाद को छोड़कर आप सभी राजनेतीको के लिए ऐसा कह सकते है!  अगर नही तो ये कारण सिर्फ़ एक छ्लावे के कुछ नही, ओर ये आभास देता है की कारण कुछ ओर ही है! तो अब कारण क्या हो सकता है? यश, पैसा या फिर कुछ ओर?

यश तो किसी भी नेता के लिए उचित कारण सा नही लगता, क्योंकि हर नेता को ये पता है की उसके नेता बनने से वो यश्सवि कम ओर भ्रशटचारि ज़यादा कहलाएगा! या फिर ऐसे समझे पहले से ही यश प्राप्त अभिनेता, व्कील, खिलाड़ी, ओद्योग्पति वगेरह ओर किस यश की तलाश मे राजनीति मे आते है!
पैसा उचित कारण नही लगता जैसा की आप जानते है की चुनाव लड़ने के लिए नेता का पढे लिखे से धनवान होना ज़्यादा जरूरी है, इस गणित से तो नेता पहले से ही पैसे वाला है! या यूँ भी कहें की एक चुनाव जीत कर एक नेता इतना पैसा कमा लेता है की उसकी आने वाली ७ पीडियाँ बिना कुछ किए आराम से गुजर बसर करे तो फिर दोबारा नेता बनाने का लालच क्यों? या फिर क्यों कोई उद्योगपति अपना पैसा लगाकर श्रमिक संघर्ष, सरकारी भ्रष्टाचार, जबरन टेक्स लूट, तनाव की प्र्तारन सहने से अच्छा राजनीति मे ना जाए?

उपरोक्त दोनो कारण संभवत ढोस प्रमाण न हो परंतु निश्चित ही किसी व्यक्ति के राजनीति मे आने का कारण सन्देअह्स्पाद बनाते हें!  मेरा विश्वास ये कहता है की कोई भी इन को कारण के लिए राजनीति मे नही आएगा! तो फिर क्या ओर कारण हो सकता है या कोन सी लाचारी है?

अब में आपको अपने निष्कर्ष से अवगत करता हूँ, में यह मानता हूँ की किसी वियक्ति का राजनीति मे आना उसकी वंशागुणत्  दबी अभिलाषा का परीणाम है!  ये वंशागुणत् अभिलाषा है क्या - शासन! जिन्हे अवसर मिला वो पीडियों से शासनाधिश है जैसे की सिंधिया वंश ओर जिन्हे नही वो अवसर पाते है राजनीति मे कूद कर शासनाधीश हो जाते है जैसे की ए. राजा!   अब ए. राजा जैसे नेताओ का वंश वृक्ष बनवाया जाए तो निश्चित ही उनके वंश मे कोई न कोई रहा होगा जिसने राज सुख भोगा होगा! ओर एक बार जिसने  राज सुख भोग लिया उसके DNA आनुवंशिकी मे ये सबसे प्रबल जीन होता है ओर बाकी सब जीन्स पर भारी पड़ता है, समय मिलते ही व्यक्ति के चेतना पर अपना वश कर लेता है! यही जीन उसे फिर से शासक होने के लिए मजबूर करता है!

अब ये सवाल उठता है की आख़िर क्यों ये जीन इतना प्रबल होता है? उत्तर एकदम साफ है - इसके जैसा दूसरा कोई नही!  उदाहरण:
1. किसी के भी साथ दूर्व्यवहार के सार्वजनिक हो जाने पर भी निर्दोष साबित होकर शासनाधिश रहना केवल एक शासक या नेता के लिए ही संभव है!
2.  बिना किसी वजह के अंगरक्षक ( now black cat commandos)  ओर चाटुकरो ( now party workers) की भीड़ तो केवल शासक या  नेता ही रख सकता है!
3.  निजी काम के लिए भी रथो का झुंड लेकर बदहवास निकलना केवल एक शासक या नेता के लिए ही संभव है!
4.  अपने को छोड़ कर बाकियों के लिए क़ानून बनाना ओर ना मानने पर दंड देना केवल एक शासक या नेता के लिए ही संभव है!
5.  योग्य व्यक्तियो को वेतन पर रख कर उनकी योग्यता को धत्ता बताकर अपनी मनमानी करना केवल एक शासक या नेता ही कर सकता है!
6.  किसी की कमाई को जबरन टेक्स के रूप मे लूटकर अपने मनमाने से ढंग से या तो कोई शासक या नेता ही खर्च कर सकता है!

ऐसे ही कई कारण जैसे परमाणु से मिलकर एक शासन रूपी जीन बनता है जो ना केवल सबसे अहम होता है वरन चेतना का भी हरण कर लेता है! इस जीन से संक्रमित व्यक्ति को ये जीन समय समय पर शासन करने के लिए उकसाता रहता है इसी कारणवश  संक्रमित व्यक्ति अपने को शासन करने के दोष से रोक नही पाता!

 

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